शिव का अपने भक्त की पूजा में शामिल होकर सेवा करना — भगवान भक्त के वश में क्यों होते हैं?


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शिव का अपने भक्त की पूजा में शामिल होकर सेवा करना

ब्राह्मण की शिव पूजा

बहुत पुराने समय की बात है। एक गरीब ब्राह्मण नास्तिको के गाँव में रहता था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। उसकी पत्नी दुष्ट स्वभाव की थी। वह अपने मन को भगवान शिव के चरणों में स्थिर रखते हुए सब कुछ सहन करता और केवल संसार के भलाई के लिए प्रार्थना करता। ब्राह्मण रोज ब्रह्ममुहुर्त में गंगा जल चढ़ाता और कहता कि हे प्रभु, सारे प्राणियों में आपका निवास है।

शिव जी का भेष धारण

भगवान शिव एक युवक का रूप धारण कर ब्राह्मण के घर पहुंचे और नौकरी की प्रार्थना की। ब्राह्मण ने कहा कि वह गरीब है, पर भगवान शिव ने कहा कि उन्हें केवल दो वक्त की रोटी चाहिए। इस प्रकार भगवान शिव उस ब्राह्मण दंपत्ति की सेवा करने लगे।

शिव जी का सेवक बनना

ब्राह्मण सुबह पूजा करता और भगवान शिव उसकी सेवा में लगे रहते। भगवान शिव गंगा जल लाते, पुष्प एवं बेलपत्र लेकर आते, और पूजा पाठ में सहयोग करते।

बाबा धाम की यात्रा

एक दिन ब्राह्मण बाबा धाम जाने का निर्णय लिया। भगवान शिव भी उनके साथ चल पड़े। जंगल में रात बिताई और सुबह गंगा जल लाए। ब्राह्मण आश्चर्यचकित रह गया कि इतनी दूर से गंगा जल कैसे आया। भगवान शिव ने अपनी जटाओं से गंगा जल निकालकर लाया।

भक्त को भगवान शिव का दर्शन

ब्राह्मण ने भगवान शिव को पहचान लिया और उनके पैरों में गिरकर विलाप किया। भगवान शिव बोले कि यह मेरा कार्य था कि मैं तुम्हारी सेवा करूँ। अंततः ब्राह्मण और उसकी पत्नी को शिव लोक में ले गए।

धन्य हैं वह भक्त, इसलिए कहा जाता है कि भगवान भक्त के वश में होते हैं।
ऊँ नमः शिवाय, ऊँ नमः शिवाय, ऊँ नमः शिवाय, हर हर महादेव।

डिस्क्लेमर: यह कथा केवल धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षा के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य किसी भी धर्म या व्यक्ति को चुनौती देना नहीं है। सभी पाठक इसे श्रद्धा भाव से पढ़ें।

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