मैं कौन हूँ? जन्म, जीवन और मृत्यु के बीच छिपा सबसे बड़ा प्रश्न
मैं कौन हूँ? जन्म और मृत्यु के बीच मनुष्य के सामने सबसे गहरा प्रश्न—मैं वास्तव में कौन हूँ? मनुष्य ने संसार को समझने के लिए असंख्य प्रश्न पूछे हैं। उसने आकाश को देखा, तारों को समझने का प्रयास किया, पदार्थ के सूक्ष्मतम कणों तक पहुँचा और जीवन की जैविक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया। लेकिन इन सबके बीच एक प्रश्न ऐसा है जो जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही गहरा है— मैं कौन हूँ? हम सामान्यतः अपने नाम, शरीर, परिवार, काम, विचार और स्मृतियों के आधार पर स्वयं को पहचानते हैं। लेकिन यदि इन सभी को एक-एक करके प्रश्न के सामने रखा जाए, तो क्या इनमें से कोई वास्तव में उस “मैं” की पूरी पहचान है? यहीं से एक अलग प्रकार का मंथन आरम्भ होता है। जन्म—जिसका निर्णय मैंने नहीं लिया जब हम अपने जन्म के बारे में सोचते हैं तो एक बहुत साधारण लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। हमने स्वयं यह निर्णय नहीं लिया कि हमें जन्म लेना है। हमने अपने माता-पिता का चुनाव नहीं किया। हमने अपना शरीर नहीं बनाया। हमने यह तय नहीं किया कि हमारा जन्म कब और कहाँ होगा। जीवविज्ञान ज...