शिव ही मति है शिव ही गति है का अर्थ क्या है
शिव कौन हैं? (सबसे मूल सत्य) शिव को सामान्य रूप से देवता के रूप में देखा जाता है, लेकिन शैव दर्शन में शिव का अर्थ कहीं अधिक गहरा है। शिव = शुद्ध चेतना (Pure Awareness) यह वह स्थिति है: जो सब कुछ जानती है लेकिन किसी चीज़ से प्रभावित नहीं होती जो स्थिर है लेकिन हर चीज़ को चला रही है उदाहरण: जैसे समुद्र में: लहरें उठती हैं गिरती हैं बदलती हैं लेकिन समुद्र स्वयं वही रहता है। इसी तरह चेतना (Shiva) स्थिर है, और जीवन उसकी लहरें हैं। 2. “शिव ही मति है” — बुद्धि का रहस्य क्या है? “मति” का अर्थ है: बुद्धि सोचने की क्षमता निर्णय लेने की शक्ति समझ और विश्लेषण हम सब मानते हैं: “मैं सोच रहा हूँ” लेकिन शैव दर्शन कहता है: सोच “मैं” नहीं करता — सोच अपने आप चेतना में उठती है। आधुनिक उदाहरण: (1) अचानक विचार कैसे आते हैं? आपने कभी देखा होगा: बिना प्रयास के विचार आते हैं अचानक समाधान मिल जाता है कई बार आप खुद सोचते हैं: “यह विचार आया कहाँ से?” इसका अर्थ: विचार “उत्पन्न” नहीं किए जाते, वे चेतना में “प्रकट” होते हैं। (2) निर्णय लेने की प्रक्रिया जब आप कोई निर्णय लेते हैं: कई विकल्प आते हैं ...