मनुष्य परम प्रकाश को क्यों नहीं सहन कर पाता? | अर्जुन के विराट दर्शन का रहस्य
मनुष्य परम प्रकाश को क्यों नहीं सहन कर पाता? — अर्जुन के विराट दर्शन से मिलने वाली शिक्षा भूमिका मनुष्य सदियों से ईश्वर, सत्य और परम प्रकाश की खोज करता आया है। ऋषियों ने तप किया, योगियों ने ध्यान किया और भक्तों ने भक्ति के मार्ग को अपनाया। किंतु एक प्रश्न बार-बार उठता है—यदि ईश्वर का स्वरूप प्रकाशमय है, तो मनुष्य उस परम प्रकाश को सहज रूप से क्यों नहीं देख पाता? इस प्रश्न का उत्तर हमें श्रीमद्भगवद्गीता के विराट रूप दर्शन योग में मिलता है। अर्जुन की जिज्ञासा महाभारत के युद्धक्षेत्र में जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान दिया, तब अर्जुन के मन में इच्छा उत्पन्न हुई कि वे भगवान के वास्तविक विराट स्वरूप का दर्शन करें। अर्जुन ने भगवान से कहा कि यदि वे उन्हें योग्य समझें, तो अपना दिव्य रूप दिखाएँ। भगवान ने दिव्य दृष्टि प्रदान की और फिर अपना विराट रूप प्रकट किया। विराट रूप का अद्भुत दर्शन अर्जुन ने उस रूप में अनगिनत मुख, नेत्र, दिव्य आयुध, देवता, ऋषि और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को एक साथ देखा। गीता में वर्णन आता है कि यदि आकाश में हजारों सूर्य एक साथ उदित हो जाएँ, तो भी उनका प्रका...