लिंग पुराण के अनुसार योग साधना कहाँ करनी चाहिए? किन स्थानों पर योग वर्जित है?
लिंग पुराण के अनुसार योग साधना का आदर्श स्थान लिंग पुराण अध्याय 8 के अनुसार एकांत, पवित्र और शांत स्थान में भगवान शिव का स्मरण करते हुए योग साधना करने वाला साधक। भूमिका योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं है, बल्कि यह मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करने का दिव्य मार्ग है। लिंग पुराण (अध्याय 8) में योग साधना के ऐसे नियम बताए गए हैं, जो आज भी प्रत्येक साधक के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इस अध्याय में बुद्धि की महिमा, प्राणायाम का महत्व, योग के विभिन्न अंग तथा योग साधना के लिए उपयुक्त और अनुपयुक्त स्थानों का विस्तार से वर्णन मिलता है। आज के समय में अधिकांश लोग केवल आसन और प्राणायाम तक ही योग को सीमित समझते हैं, जबकि लिंग पुराण स्पष्ट करता है कि योग की सफलता साधक की शुद्ध बुद्धि, उचित स्थान, सात्त्विक वातावरण और नियमित अभ्यास पर भी निर्भर करती है। बुद्धि के अनेक दिव्य स्वरूप लिंग पुराण में बुद्धि के अनेक नाम बताए गए हैं। उसे विश्वर, महान, प्रज्ञा, मन, ब्रह्म, चिति, स्मृति, ख्याति, संवित् तथा मति कहा गया है। इन नामों के माध्यम से बुद्धि के विभिन्न गुणों का वर्णन किया गया है। सभी तत्त...