प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान: जब भारत ने आकाश की गतिविधियों को समझने का प्रयास किया
प्रकाशन तिथि: 14 अक्टूबर 2026 प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान: आकाश के रहस्यों की खोज प्राचीन भारत में खगोलीय घटनाओं का निरीक्षण, समय की गणना और गणितीय अध्ययन ज्ञान-विकास की महत्त्वपूर्ण परंपराएँ थीं। प्रस्तावना: आकाश को देखकर उठे प्रश्न रात के शांत आकाश में चमकते तारों को देखकर क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों वर्ष पहले मनुष्य ने इनकी गतिविधियों को कैसे समझा होगा? सूर्य प्रतिदिन पूर्व से उदित होकर पश्चिम में अस्त होता दिखाई देता है। चंद्रमा का आकार बदलता रहता है। कुछ तारे मौसम के साथ अलग-अलग समय पर दिखाई देते हैं और कभी-कभी सूर्य या चंद्रमा ग्रहण के कारण आंशिक अथवा पूरी तरह ढक जाते हैं। आज हमारे पास दूरबीनें, अंतरिक्ष यान, उपग्रह और आधुनिक गणनाएँ हैं। लेकिन प्राचीन काल में मनुष्य के पास मुख्यतः अपनी आँखें, प्रकृति का सूक्ष्म निरीक्षण, गणित और लंबे समय तक किए गए अनुभवों का सहारा था। भारतीय ज्ञान परंपरा में आकाश का अध्ययन केवल आश्चर्य का विषय नहीं था। इससे समय की गणना, ऋतुओं की पहचान, पंचांग निर्माण और खगोलीय घटनाओं का अनुमान लगाने जैसे व्यावहारिक कार्य भी जुड़े थे। प्राचीन भारतीय खगोल...