क्या आज भी योग से ईश्वर की प्राप्ति संभव है? सत्य, करुणा और संतोष का महत्व
योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि सत्य, करुणा और संयम से युक्त जीवन जीने का मार्ग है। सत्य और करुणा से प्रकाशित होता है योग का मार्ग योग का वास्तविक उद्देश्य केवल शरीर का अभ्यास नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, संतोष और आत्मसंयम से जीवन को प्रकाशित करना है। क्या आज भी योग से ईश्वर की प्राप्ति संभव है? एक प्रेरक चिंतन एक प्रेरक प्रसंग में बताया जाता है कि कुछ शिष्यों ने भगवान बुद्ध से पूछा—"क्या आज भी योग के माध्यम से ईश्वर की प्राप्ति संभव है?" इस पर उन्होंने मुस्कुराकर संकेत दिया कि मार्ग आज भी खुला है, लेकिन साधक का जीवन बदलना आवश्यक है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों का जीवन सत्य, करुणा, संतोष और अनुशासन से परिपूर्ण होता था। वे ब्रह्ममुहूर्त में जागते, मन को संयमित रखते और अपना अधिकांश समय साधना, स्वाध्याय तथा लोककल्याण में लगाते थे। उनके जीवन में लोभ, छल, ईर्ष्या और अहंकार का स्थान बहुत कम था। परदुःखकातरता अर्थात दूसरों के दुःख को अपना दुःख समझना, उनके जीवन का स्वाभाविक गुण था। आज मनुष्य का अधिकांश समय धन, प्रतिस्पर्धा और भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में व्यतीत हो जाता है। जीवन ...