लिंग पुराण की अद्भुत कथा: महर्षि दधीचि और राजा क्षुप
महर्षि दधीचि और राजा क्षुप की कथा: जब शिवभक्ति के आगे देवता भी नतमस्तक हुए लिंग पुराण में वर्णित महर्षि दधीचि और राजा क्षुप की कथा केवल एक युद्ध की कथा नहीं है। यह कथा बताती है कि तप, भक्ति और ईश्वर की कृपा मनुष्य को कितना महान बना सकती है। विवाद की शुरुआत राजा क्षुप और महर्षि दधीचि में मित्रता थी। समय बीतने पर दोनों के बीच एक प्रश्न को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। राजा क्षुप का मत था कि क्षत्रिय श्रेष्ठ होता है, क्योंकि वह प्रजा की रक्षा करता है और राज्य का संचालन करता है। महर्षि दधीचि का मत था कि ब्राह्मण श्रेष्ठ होता है, क्योंकि वह ज्ञान और धर्म का मार्ग दिखाता है। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच संघर्ष हो गया। वज्र का प्रहार और पुनर्जीवन राजा क्षुप के पास इन्द्र द्वारा प्रदान किया गया वज्र था। उन्होंने उस वज्र से महर्षि दधीचि पर प्रहार किया। दधीचि घायल होकर भूमि पर गिर पड़े। उसी समय शुक्राचार्य वहाँ पहुँचे। उन्होंने अपनी विद्या से महर्षि दधीचि को पुनर्जीवित किया और उन्हें महामृत्युंजय मंत्र तथा भगवान शिव की आराधना का महत्व बताया। शिव की आराधना और वरदान महर्षि दधी...