जीवन और मृत्यु में क्या अंतर है? सनातन धर्म की अद्भुत व्याख्या
जीवन और मृत्यु का सनातन रहस्य सनातन धर्म के अनुसार मृत्यु अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा का प्रारंभ है। मनुष्य के मन में सबसे प्राचीन और गहरा प्रश्न यही रहा है— जीवन क्या है और मृत्यु क्या है? हम प्रतिदिन जन्म और मृत्यु की घटनाएँ देखते हैं, लेकिन इन दोनों के वास्तविक अंतर को बहुत कम लोग समझ पाते हैं। सनातन धर्म के अनुसार जीवन और मृत्यु दो विरोधी अवस्थाएँ नहीं हैं, बल्कि एक ही यात्रा के दो पड़ाव हैं। जीवन क्या है? जब पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—से बना शरीर चेतना के साथ कार्य करता है, तब उसे जीवन कहा जाता है। हम चलते हैं, बोलते हैं, सोचते हैं, प्रेम करते हैं, कर्म करते हैं। इन सबका आधार केवल शरीर नहीं, बल्कि शरीर में स्थित चेतना है। मृत्यु क्या है? मृत्यु वह क्षण है जब चेतना शरीर में कार्य करना बंद कर देती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि मृत्यु के तुरंत बाद भी शरीर वही रहता है। आँखें, हाथ, मस्तिष्क और हृदय सब वहीं होते हैं, फिर भी शरीर निष्क्रिय हो जाता है। यही प्रश्न ऋषियों को आत्मा के रहस्य तक ले गया। श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश भगवान श्रीकृष्ण कहत...