लिंग पुराण में शिव-तत्त्व, माया और मोक्ष का रहस्य
लिंग पुराण में शिव-तत्त्व, माया और मोक्ष का रहस्य (एक गहन आध्यात्मिक विवेचन) भूमिका भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में लिंग पुराण को शिव-तत्त्व के गूढ़ रहस्यों को समझाने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इसमें केवल पूजा या कथा नहीं, बल्कि जीवन, चेतना, माया और मोक्ष का अत्यंत सूक्ष्म दर्शन प्रस्तुत किया गया है। यह प्रसंग उस संवाद पर आधारित है जिसमें ऋषिगण भगवान शिव से प्रश्न करते हैं और उन्हें परम सत्य का बोध प्राप्त होता है। शिव का उत्तर: परम चेतना जो सबसे परे है जब ऋषियों ने भगवान शिव से प्रश्न किया कि वे देवी पार्वती के साथ लीला क्यों करते हैं, तब भगवान शिव ने कहा: मेरे लिए न बंधन है, न मोक्ष मैं सर्वव्यापी, सर्वज्ञ और कर्तव्य-रहित हूँ जीव सीमित और अज्ञान से युक्त है इसका अर्थ यह है कि शिव स्वयं परम चेतना (Absolute Reality) हैं, जो सभी द्वैत से परे हैं। जीव और अज्ञान का बंधन शास्त्र के अनुसार: जीव अणु स्वरूप है वह स्वयं को “कर्ता” मानता है यही भाव उसे कर्म और बंधन में डालता है जीव का अज्ञान ही उसके अनुभव और सीमाओं का कारण बनता है। माया का रहस्य म...