एकोऽहम् बहुस्यामि : क्या सम्पूर्ण सृष्टि ईश्वर की दिव्य लीला है? | सनातन धर्म का रहस्य
एकोऽहम् बहुस्यामि : सम्पूर्ण सृष्टि ईश्वर की दिव्य लीला सनातन धर्म के अनुसार सम्पूर्ण जगत उसी एक परम चेतना की अनंत अभिव्यक्ति है। क्या सम्पूर्ण सृष्टि ईश्वर की दिव्य लीला है? एकोऽहम् बहुस्यामि : एक से अनेक होने का सनातन रहस्य भूमिका जब कोई साधक शांत मन से , सूर्य बिना किसी स्वार्थ के प्रकाश देता है। पुष्प बिना किसी आग्रह के सुगंध फैलाता है। नदी बिना भेदभाव के सबको जल देती है। उसी प्रकार परमात्मा की पूर्ण सत्ता से यह सम्पूर्ण सृष्टि प्रकट होती है। यह किसी आवश्यकता का परिणाम नहीं, बल्कि दिव्य अभिव्यक्ति है। सूर्य और जल का उदाहरण एक सूर्य आकाश में स्थित है। किन्तु यदि हजारों तालाब, नदियाँ और जल से भरे पात्र हों, तो प्रत्येक में सूर्य का अलग-अलग प्रतिबिंब दिखाई देता है। क्या वास्तव में हजारों सूर्य हैं? नहीं। सूर्य एक ही है। प्रतिबिंब अनेक दिखाई देते हैं। इसी प्रकार परमात्मा एक हैं। जीव असंख्य दिखाई देते हैं। मूल चेतना एक ही है। यदि सबमें वही हैं, तो भेदभाव क्यों? यही प्रश्न मनुष्य को सबसे अधिक भ्रमित करता है। यदि सबमें ईश्वर हैं, तो फिर कोई ज्ञानी है, कोई अज्ञा...