भगवान शिव के प्रतीक: त्रिशूल, चंद्रमा, गंगा, रुद्राक्ष और उनका आध्यात्मिक अर्थ
ॐ अजय स्मरामि 🙏 भगवान शिव द्वारा धारण की गई प्रत्येक वस्तु का आध्यात्मिक महत्व भगवान शिव को केवल एक देवता के रूप में देखना, उनके स्वरूप के साथ अन्याय है। शिव स्वयं में एक जीवित दर्शन हैं। वे जो कुछ भी धारण करते हैं—त्रिशूल, चंद्रमा, गंगा, रुद्राक्ष, नाग, भस्म—ये सब आभूषण नहीं, बल्कि मानव चेतना के लिए गूढ़ उपदेश हैं। शिव मौन हैं, लेकिन उनके प्रतीक बोलते हैं। यदि साधक उन्हें समझ ले, तो जीवन स्वयं साधना बन जाता है। 🔱 त्रिशूल — समय, कर्म और चेतना का नियंत्रण त्रिशूल के तीन शूल तीन कालों का प्रतिनिधित्व करते हैं—अतीत, वर्तमान और भविष्य। भगवान शिव त्रिशूल को धारण करते हैं, क्योंकि वे समय के दास नहीं हैं, बल्कि समय के साक्षी हैं। आध्यात्मिक संकेत: जो व्यक्ति अतीत के पछतावे और भविष्य के भय से मुक्त होकर वर्तमान में स्थित हो जाता है, वही त्रिशूल की वास्तविक साधना करता है। 🌙 चंद्रमा — मन पर अधिकार चंद्रमा मन का प्रतीक है। शिव उसे अपने मस्तक पर धारण करते हैं, हृदय में नहीं। इसका स्पष्ट संदेश है कि मन को जीवन का शासक नहीं, बल्कि उपकरण बनाना चाहिए। आध्यात्मिक संकेत: मन का उठ...