एक शिव भक्त की मनोभाव का दर्शन “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं : शिव प्रेम, करुणा और निष्काम भक्ति का पथ”
मिश्रा जी की शिव भक्ति : “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” मंत्र का वैश्विक संदेश प्रस्तावना मैं त्रयंबकम नाथ मिश्रा, भगवान महादेव की भक्ति में लीन होकर समस्त विश्व में “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” मंत्र का प्रचार-प्रसार करना चाहता हूँ। मेरी भावना है कि सम्पूर्ण मानव समाज में शिवतत्व का जागरण हो और प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में करुणा, प्रेम, शांति तथा पवित्रता का प्रकाश उत्पन्न हो। मेरे अंतर्मन में यह भाव सदैव जागृत रहता है कि संसार की समस्त नारी जाति उम्र के अनुसार मेरी माता, बहन और पुत्री के स्वरूप में दिखाई दे। भारतीय सनातन संस्कृति का यह महान सिद्धांत— “मातृवत् परदारेषु, परद्रव्येषु लोष्ठवत्। आत्मवत् सर्वभूतेषु, यः पश्यति सः पण्डितः॥” मनुष्य को दिव्यता की ओर ले जाने वाला मार्ग है। इसी भावना से मैं समस्त प्राणी जगत की सेवा भगवान शिव का कृपा-पात्र बनकर करना चाहता हूँ। शिव : करुणा और कृपा के सागर भगवान शिव अत्यंत दयालु, करुणामय और भक्तवत्सल हैं। वे केवल देवताओं के देव ही नहीं, बल्कि दुखियों के सहारा, पतितों के उद्धारक और भक्तों के जीवन में आशा का दीपक हैं। जब कोई भक्त इस भावना से शिव...