श्वेताश्वतर उपनिषद में रुद्र कौन हैं? जानिए उपनिषदों का गहन रहस्य
उपनिषदों में वर्णित परम चेतना स्वरूप रुद्र श्वेताश्वतर उपनिषद रुद्र को केवल देवता नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि में व्याप्त परम चेतना और परम सत्य के रूप में प्रस्तुत करता है। श्वेताश्वतर उपनिषद में रुद्र का रहस्य: क्या रुद्र ही परम ब्रह्म हैं? भूमिका सनातन धर्म में भगवान शिव के स्वरूप का वर्णन अनेक ग्रंथों में मिलता है। पुराणों में वे कैलाशवासी, जटाधारी, नीलकण्ठ और त्रिशूलधारी महादेव के रूप में प्रकट होते हैं। किंतु जब हम उपनिषदों का अध्ययन करते हैं, तो वहाँ भगवान शिव का स्वरूप और भी गहन तथा दार्शनिक हो जाता है। विशेष रूप से श्वेताश्वतर उपनिषद में "रुद्र" को केवल एक देवता के रूप में नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के परम कारण, सर्वव्यापक चेतना और परम सत्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि यह उपनिषद शिव-दर्शन को समझने वाले प्रत्येक साधक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। रुद्र शब्द का वास्तविक अर्थ सामान्यतः लोग रुद्र को केवल भगवान शिव का एक नाम मानते हैं, परंतु उपनिषदों में "रुद्र" का अर्थ कहीं अधिक व्यापक है। रुद्र वह है— जो समस्त जगत का आधार है। ...