क्या आपकी आस्था विश्वास है या अंधविश्वास? सनातन धर्म क्या कहता है
विश्वास और अंधविश्वास के मध्य विवेक का प्रकाश सनातन धर्म सिखाता है कि वास्तविक विश्वास अनुभव, साधना और विवेक से जन्म लेता है, जबकि अंधविश्वास विवेक के अभाव से उत्पन्न होता है।विश्वास और अंधविश्वास में क्या अंतर है? सनातन धर्म की दृष्टि से समझिए भूमिका आज के समय में "विश्वास" और "अंधविश्वास" शब्दों का प्रयोग अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर कर दिया जाता है। कुछ लोग हर धार्मिक आस्था को अंधविश्वास कह देते हैं, जबकि कुछ लोग बिना विचार किए हर बात को विश्वास मान लेते हैं। किन्तु सनातन धर्म इन दोनों के बीच स्पष्ट अंतर बताता है। शास्त्र, उपनिषद, भगवद्गीता और ऋषियों की परंपरा हमें सिखाती है कि विश्वास विवेक से जन्म लेता है, जबकि अंधविश्वास विवेक के अभाव से। विश्वास क्या है? विश्वास वह है जो सत्य की खोज, अध्ययन, अनुभव और साधना से धीरे-धीरे दृढ़ होता है। जब साधक शास्त्रों का अध्ययन करता है, गुरु के मार्गदर्शन में जीवन को सुधारता है और साधना के परिणामस्वरूप अपने भीतर शांति, संयम और करुणा का अनुभव करता है, तब उसके भीतर जो श्रद्धा उत्पन्न होती है, वही वास्तविक विश्वास है। इसलिए...