लिंग पुराण के अनुसार प्राणायाम में अभ्यास क्यों आवश्यक है? सिंह, हाथी और शरभ का अद्भुत उदाहरण
लिंग पुराण के अनुसार प्राणायाम की सिद्धि एक दिन में नहीं मिलती। निरंतर अभ्यास से ही प्राणवायु संतुलित होती है और मन, वचन तथा कर्म के दोष धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। नियमित अभ्यास से ही प्राणवायु होती है शांत लिंग पुराण सिखाता है कि जैसे सिंह, हाथी और शरभ अभ्यास से वश में हो जाते हैं, वैसे ही नियमित साधना से प्राणवायु, मन और इंद्रियाँ भी संतुलित होने लगती हैं। लिंग पुराण के अनुसार प्राणायाम में अभ्यास क्यों आवश्यक है? सिंह, हाथी और शरभ का अद्भुत उदाहरण प्राणायाम का वास्तविक उद्देश्य केवल श्वास को नियंत्रित करना नहीं है। लिंग पुराण में इसके अभ्यास के महत्व को समझाने के लिए अत्यंत सुंदर उदाहरण दिया गया है। ग्रंथ बताता है कि जैसे मतवाले सिंह, हाथी और शरभ स्वभाव से अत्यंत बलवान और दुराधर्ष होते हैं, वैसे ही प्राणवायु भी आरंभ में सहज रूप से वश में नहीं आती। सिंह, हाथी और शरभ का उदाहरण लिंग पुराण के अनुसार जब सिंह, हाथी और शरभ को उचित विधि तथा निरंतर अभ्यास से प्रशिक्षित किया जाता है, तब वे धीरे-धीरे अपनी उग्रता छोड़कर वश में आ जाते हैं। उसी प्रकार प्राणवायु भी प्रारम्भ में अस्थिर प्रत...