परिचय से प्रेम होता है: आध्यात्मिक जीवन का एक शाश्वत सत्य
परिचय से प्रेम होता है: आध्यात्मिक जीवन का एक गहरा सत्य जब परिचय गहरा होता है, तब श्रद्धा जन्म लेती है; और जब श्रद्धा परिपक्व होती है, तब प्रेम अपने आप प्रकट हो जाता है। मनुष्य के जीवन में प्रेम का बहुत महत्व है। प्रत्येक व्यक्ति प्रेम चाहता है और प्रेम देना भी चाहता है। लेकिन एक प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है— प्रेम उत्पन्न कैसे होता है? क्या प्रेम अचानक जन्म लेता है? क्या प्रेम केवल भावनाओं का परिणाम है? या उसके पीछे कोई गहरा नियम कार्य करता है? यदि जीवन को ध्यानपूर्वक देखा जाए तो एक सरल किंतु अत्यंत गहरा सत्य सामने आता है— परिचय से प्रेम होता है। जिस वस्तु, व्यक्ति या सत्य से हमारा कोई परिचय नहीं होता, उसके प्रति हमारे मन में सामान्यतः उदासीनता रहती है। कभी-कभी अज्ञान के कारण भय भी उत्पन्न हो जाता है। लेकिन जैसे-जैसे परिचय बढ़ता है, वैसे-वैसे दूरी कम होने लगती है। पहले जिज्ञासा जन्म लेती है। फिर समझ विकसित होती है। फिर विश्वास उत्पन्न होता है। और अंततः प्रेम प्रकट होने लगता है। यह नियम केवल मनुष्यों के संबंधों पर ही लागू नहीं होता, बल्कि आध्यात्मिक जीवन में भी उतना ही स...