"अवधूत अवतार: भगवान शिव की लीला जो अहंकार को कर दे भस्म"
अवधूत अवतार की कथा भगवान शिव सृष्टि के आदि स्त्रोत, योगियो के अधिपति,और समस्त भौतिक मोह माया से परे परब्रह्म है । उनके विभिन्न अवतारों में से एक रुप ऐसा भी है जो साधारण समझ से परे है।- अवधूत अवतार यह अवतार केवल तपस्वियों के लिए ही नहीं प्रेरणा है , बल्कि अहंकार से ग्रसित देवताओं के लिए भी चेतावनी है। अवधूत अवतार का महत्व:- शिव के अवधूत रुप से शिव भक्तों को नया ज्ञान ,एवं नई दिशा मिलती है । इस अवतार में भगवान शिव ने वैराग्य और संन्यास का सर्वोच्च रूप धारण किया है। यह अवतार निराकार शिव के साधकों के लिए एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। अवधूत का शाब्दिक अर्थ होता है सांसारिक मोह माया से परे होना। संसार के किसी भी नियम का और बंधन का उसे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना। भगवान शिव सृष्टि के आदि स्त्रोत, योगियों के अधिपति, और समस्त भौतिक मोह माया से परे परब्रह्म है । उनके विभिन्न अवतारों में से एक रुप ऐसा भी है जो साधारण समझ से परे है।- अवधूत अवतार यह अवतार योगेश्वर शिव ने देवराज इंद्र के घमंड को दूर करने के लिए ,एव...