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शिवरात्रि की शिक्षा और ओम नमः शिवाय मंत्र की महिमा | शिव भक्ति का मार्ग

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शिव का दर्शन कैसे करें शिव का दर्शन कैसे करें 1. शिव दर्शन और चिंतन हम अक्सर केवल शरीर के सुख के लिए भोग-विलास की चीजें खरीदते हैं। प्रतिष्ठा बढ़ाने और इच्छाएँ पूरी करने के लिए धन की आवश्यकता होती है। जब मनचाही वस्तुएँ नहीं मिलतीं, तो चिंता होती है। शिव का दर्शन करने का अर्थ है: चिंता छोड़ना और चिंतन करना अपने मन और विचारों को शिव के वातावरण में लगाना शरीर की चिंता छोड़कर आत्माभिमुख होना भगवान शिव सभी प्राणियों के हृदय में सूक्ष्म रूप से स्थित हैं। उन्हें देखने के लिए दिव्य दृष्टि चाहिए। 2. शारीरिक कर्म और मानसिक कर्म भगवान शिव के दर्शन के लिए केवल शरीर ही नहीं, मन का निर्मल होना भी आवश्यक है। कथा: शिवरात्रि मेला शिवरात्रि मेले में अधिकांश लोग केवल मौज-मस्ती के लिए आए। भगवान शिव ने एक अपाहिज पति और अत्यंत सुंदर पत्नी की रचना की। लोग सुंदर स्त्री के पीछे लगे, लेकिन एक युवक पहले भगवान शिव की पूजा करने आया। भगवान शिव ने कहा: “यह मेरा वास्तविक भक्त है।” सीख: वाचा (वचन), मनसा (मन), और कर्मणा (कर्म) से पवित्र होकर भक्ति करें। शरीर और मानसिक कर्म से कल्याण...