नववर्ष 2026: भगवान गणेश जी की जन्म कथा, शिव और पार्वती का आशीर्वाद
नववर्ष 2026: मंगलकर्ता भगवान गणेश जी की जन्म कथा और भगवान शिव एवं माता जगदंबे का आशीर्वाद
गजानन का दिव्य जन्म
ब्रह्मा जी नारद से कहते हैं कि माता दुर्गा के पुत्र गजानन का पुनर्जन्म हुआ और समस्त देवता अत्यंत प्रसन्न हुए।
देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती ने बालक गणेश का विधिवत अभिषेक किया।
माता गिरिजा ने अपने पुत्र को दिव्य वस्त्र और आभूषण दिए।
भगवान शिव और माता पार्वती ने आशीर्वाद दिया कि गणेश जी का नाम सर्वदा पूज्य रहेगा।
इस समय आकाश से पुष्पवर्षा होने लगी और गंधर्व गीत गाने लगे।
अप्सराएँ नृत्य कर समस्त लोक में हर्ष उल्लास का वातावरण बना।
सर्वाध्यक्ष और विघ्नहर
माता जगदंबा ने कहा कि गणेश जी की पूजा सर्वप्रथम करनी चाहिए, यदि गणेश जी की पूजा सर्वप्रथम ना करके किसी भी देव पूजा करने पर वह पूजा निष्फल होगी।
सिंदूर, चंदन, पुष्प और नैवेद्य से की गई पूजा विशेष फलदायक होगी।
सभी देवताओं ने गणेश जी को सर्वाध्यक्ष घोषित किया।
गणेश जी सर्व विघ्नों को नाश करने वाले हैं और मनुष्य पर हमेशा कृपा करेंगे।
सभी देवता और गंधर्व उनके दिव्य रूप से अभिभूत हो गए।
इस प्रकार गणेश जी का प्रथम आशीर्वाद और दिव्यता का प्रसार हुआ।
चतुर्थी व्रत और पूजन विधि
भगवान शिव ने कहा कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को हुआ था।
चंद्रमा के शुभोदय और रात्रि के प्रथम प्रहर में उनका दिव्य प्राकट्य हुआ।
इस तिथि पर गणेश चतुर्थी व्रत अत्यंत पुण्यदायी है।
प्रातः स्नान और प्राण प्रतिष्ठा के साथ पूजन का विधान किया गया।
दूर्वा जड़ रहित, बारह अंगुल लंबी और तीन गांठ वाली होनी चाहिए।
इस विधि से गणेश पूजन करने से सभी विघ्न दूर होते हैं।
गणेश की विनम्रता और आशीर्वाद
गणेश पूजन के पश्चात सभी देवताओं ने बालक गणेश को भगवान शिव की गोद में बैठाया।
भगवान शिव और माता पार्वती ने स्नेहपूर्वक उनके मस्तक को चूमा और आशीर्वाद दिया।
गणेश जी ने माता-पिता और देवताओं से क्षमा प्रार्थना की।
उनकी विनम्रता देखकर देवता अत्यंत प्रसन्न हुए।
अंततः सभी देवता भगवान शिव का पूजन कर अपने-अपने लोक को लौट गए।
इस प्रकार नववर्ष 2026 की मंगलकामनाओं के लिए गणेश जी का आशीर्वाद सर्वत्र फैल गया।

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