शक्ति और महर्षि पराशर की कथा – श्री लिंग महापुराण

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ॐ अजय स्मरामि

शक्ति और महर्षि पराशर की कथा

(श्री लिंग महापुराण से उद्धृत)

परिचय

श्री लिंग महापुराण में वशिष्ठ के ज्येष्ठ पुत्र शक्ति का आख्यान और महर्षि पराशर की कथा वर्णित है — जिसमें शिव कृपा, विष्णु का आशीर्वाद और वशिष्ठ वंश का उद्धार सम्मिलित है।

● वशिष्ठ पुत्र शक्ति का भक्षण :

एक बार ऋषियों ने सूत जी से पूछा — हे सूतजी! यह बताइए कि वशिष्ठपुत्र शक्ति का भक्षण कैसे हुआ?

सूत जी बोले — रुधिर नामक राक्षस पूर्वकाल में विश्वामित्र के श्राप से उत्पन्न हुआ था। उसी ने वशिष्ठ के पुत्र शक्ति और उनके छोटे भाइयों का भक्षण कर लिया। यह सुनकर वशिष्ठ जी अत्यंत व्यथित हो उठे और मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। जब वे पर्वत से कूदने लगे तो देवी पृथ्वी ने अपने करों में उन्हें थाम लिया।

उनकी पत्नी और पुत्रवधू अत्यन्त दु:खी हुईं। पुत्रवधू ने दुःख में अपने गर्भ को पीटना प्रारंभ किया — उसी समय वशिष्ठ को चेतना वापस आई और उन्होंने पुत्रवधू से कहा — “पुत्री, अपने शरीर का त्याग मत करो; तुम्हारे गर्भ में जो बालक है, वही हमारे वंश को पुनर्जीवित करेगा।”

पुत्रवधू बोली — “हे गुरुदेव, यदि ऐसा है तो मैं शुभ-अशुभ किसी भी रूप में अपने गर्भ की रक्षा करूंगी। पति से विहीन स्त्री के लिए जीवन कितना कष्टदायक होता है यह मैं जानती हूं; फिर भी मैं इस गर्भ को जीवित रखूंगी।”

● भगवान विष्णु का आशीर्वाद :

उसी समय आकाश में भगवान श्री विष्णु प्रकट हुए और बोले — “गर्भस्थ यह शिशु रुद्रभक्त होगा। वह शिव की उपासना करेगा और संपूर्ण कुल का उद्धार करेगा।” इतना कहकर भगवान विष्णु अंतर्धान हो गए।

● ऋषि पराशर का जन्म :

समय आने पर उस पतिव्रता स्त्री ने दसवें महीने में एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया — वही थे महर्षि पराशर। अदृश्यन्ती (पत्नीनाम) ने सभी सुख त्यागकर इस बालक का पालन-पूजन किया। एक दिन पराशर ने देखा कि उनकी माता बिना आभूषण के और उदास बैठी हैं; उन्होंने पूछा — “हे माता, आपको क्या कष्ट है?” माता ने रुदन करते हुए कहा — “वत्स, रुधिर नामक राक्षस ने तुम्हारे पिता को भक्षण कर लिया।” यह सुनकर पराशर ने एक शिवलिंग की स्थापना की और कहा — “हे देवदेवेश्वर महादेव, मुझे मेरे पिता तथा उनके भाइयों का दर्शन कराइए।” भगवान शिव प्रकट हुए और पराशर को अपने पिता और भाइयों सहित दिव्य दर्शन कराए।

● राक्षसों का संहार & वशिष्ठ की आज्ञा :

भगवान शिव के अंतर्धान के बाद पराशर ने मंत्र-यज्ञ कर राक्षसों के कुल का हवन प्रारंभ किया। वशिष्ठ ऋषि आए और बोले — “वत्स, संपूर्ण राक्षस कुल का संहार मत करो।” पराशर ने आज्ञा मानकर संयम दिखाया।

● पुलस्त्य ऋषि का आगमन :

पुलस्त्य ऋषि प्रकट हुए और बोले — “हे पराशर! तुमने मेरे वंश का नाश न किया; अतः मैं तुम्हें वर देता हूँ — तुम पुराणों की रचना करोगे और सदैव शिवकृपा से युक्त रहोगे।” इसी आशीर्वाद से महर्षि पराशर ने विष्णु पुराण की रचना की।

उपसंहार — मंत्र

ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
हर हर महादेव 🔱 हर हर महादेव 🔱

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