रूद्र की महिमा और शिवजी की असीम कृपा | भक्ति, मोक्ष और आत्मज्ञान का दिव्य रहस्य”

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रूद्र की महिमा

यजुर्वेद के 16वें अध्याय में रुद्र की महिमा का वर्णन होने के कारण ही 'रुद्राध्याय' नाम से प्रसिद्ध है। वेदों के अतिरिक्त कई स्मृतियों और इतिहास, पुराणों में भी शंकर जी का सुंदर वर्णन किया गया है।

शिवजी की महिमा लेखनी से संभव नहीं है। क्योंकि भगवान शिव अनंत गुणों के स्वामी हैं। उनके गुणों का वर्णन करने के लिए हजारों जन्म कम पड़ेंगे।

भगवान शिव अनादि, अनंत, अजन्मा और असीम विभूतियों वाले देव हैं। शिव की कृपा से सारे दु:ख दूर हो जाते हैं।

कोई भी व्यक्ति बड़ा पापी हो, तो भी यदि अंत समय में 'शिव' नाम का उच्चारण करता है, तो उसे यमराज का द्वार नहीं देखना पड़ता। शिव के सारे नाम मोक्ष प्रदान करते हैं।

ऊँ नमः शिवाय | हर-हर महादेव

यह तो गोस्वामी तुलसीदास जी भी मानते हैं कि रामचरितमानस और संसार के विशेष काव्य नाटक सब भगवान की कृपा से ही सुंदर से सुंदर बने हैं, और उनकी विश्व में प्रचार हो पाया है।

गोस्वामी तुलसीदास जी जिस समय रामचरितमानस को लिख रहे थे, उस समय कई लोग तुलसीदास जी को नीचा दिखाने के लिए रोज कोई न कोई उपाय रचते थे।

परंतु भगवान श्री राम में अत्यंत भक्ति होने के कारण तुलसीदास जी किसी भी तरह की चिंता के शिकार नहीं होते हैं। जिसके स्वंय श्री राम ही आराध्य हों, उस व्यक्ति की कोई भी क्या बिगाड़ सकता है।

प्रभु राम में अत्यंत भक्ति होने के कारण हनुमानजी सदैव तुलसीदास जी की रक्षा करते थे एवं भगवान शिव का भी वरद हस्त तुलसीदास जी पर था। तब भगवान शिव जी की कृपा से ही रामचरितमानस जगत में प्रसिद्ध हुआ और इसके द्वारा जगत का कल्याण भी हुआ।

कालिदास, मैथिल कवि विद्यापति आदि महान कवियों ने भी अपनी रचना के पहले भगवान शिव की आराधना और स्तुति की है।

डिस्क्लेमर

यह ब्लॉग केवल ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें वर्णित घटनाएँ धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से आधारित हैं। पाठक से निवेदन है कि इसे केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा हेतु पढ़ें। सभी पात्र एवं घटनाएँ पौराणिक हैं और वास्तविकता से अलग हो सकती हैं। इस ब्लॉग में किसी भी प्रकार की निंदात्मक या अपमानजनक सामग्री नहीं है। सभी पाठक इसे श्रद्धा एवं सम्मान के साथ ग्रहण करें।

लेखक: अजय कुमार

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