Shiv puja शिव गीता

ॐ शिव

शिव गीता — भगवान शिव

धर्म · दर्शन · साधना · महाकाल · त्याग
भगवान शिव का आध्यात्मिक चित्र

भगवान शिव प्राचीन, अलौकिक और कल्याणकारी हैं। यह लेख शिव के आदर्श, ध्यान, महाकाल स्वरूप और शिवचरित्र से जीवन में संतोष और त्याग की प्रेरणा लेने का सार प्रस्तुत करता है।

शिव का आदर्श

इसके विपरीत भगवान शिव का आदर्श है कि अपनी आवश्यकताओं को कम से कम रखा जाय — थोड़े से ही संतोष करना, ऐश्वर्य और वैभव का त्याग करना। लोक-कल्याणकारी गंगा को अपनी मस्तक पर धारण करना यह दिखाता है कि त्याग वृति अपनाकर हम दूसरों को भी प्रेरित कर सकते हैं।

ऐसी विशिष्ट परिस्थितियों में व्यक्ति कुछ भी नहीं करता; इसलिए जब तक हमारी निर्णय सीमाएँ सीमित नहीं होंगी, और जब तक हम सबके लिए दिन-रात मेहनत नहीं करेंगे, तब तक भगवान शिव के आदर्शों को हम ठीक से नहीं समझ पाएँगे। उनका दिन-रात तपस्या में लीन रहना यह सिखाता है कि मनुष्य को परिस्थितियों के सामने झुकना नहीं चाहिए।

भगवान शिव का ध्यान

धवलवपुषमिन्दोर्मण्डले संनिविष्टं।
भुजगवलयहारं भस्मदिग्धाङ्गमीशम्।।
हरिणपरशुपाणिं चारूचन्द्रार्धमौलिं।
हृदयकमलमध्ये संततं चिन्तयामि।।

भगवान शिव का गौर शरीर, बालचन्द्र उनके मस्तक पर शोभायमान, और सर्पों से सुसज्जित आभूषण—यह सब उनका दिव्य रूप दर्शाते हैं। वे भस्म लेपित, मृदुल हास्य लिए, और मृगी- मुद्रा तथा परसु धारण किए हुए हैं।

मैं हृदय से उनके स्तवन, चिंतन और मनन करता हूँ — क्योंकि उनका ध्यान साधकों के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत है।

महाकाल

भगवान शिव साक्षात कालों के भी काल हैं—इसीलिए महाकाल कहे जाते हैं। अपने भक्त की रक्षा हेतु वे क्रोध में आकर भी समय का पराभव कर देते हैं। वे महायोगी हैं और योग की पराकाष्ठा तक पहुँचकर साधक अनंत विभूतियों से अलंकृत होता है।

योगी कभी भोगी नहीं होता; शिव के पास अनंत शक्ति होने के बावजूद वे दिगम्बर हैं—शमशान और ध्यान उनके निवास स्थान हैं। महामाया स्वयं उनका पोषण करती है और वे उसे नियंत्रित करते हैं।

शिव जी की पूजा

शिव की पूजा विभिन्न स्थानों पर विधिपूर्वक की जाती है—बंगाल, गुजरात, नेपाल सहित सभी जगह। आवश्यकताओं की अनंतता और संसाधनों की सीमितता के बीच यदि सुख चाहिए तो हमें शिव के त्याग स्वरूप का स्मरण करना चाहिए और उनकी साधना में लीन होना चाहिए।

समाधिस्थित शिव साधकों के लिए प्रेरणादायक हैं—क्योंकि उन्होंने वैभव होते हुए भी कुछ नहीं रखा। माता पार्वती के आग्रह पर भी जब सोने की लंका बनाकर दी गई तो भी वह दान कर दी गई। इस त्याग से जीवन में सादगी बनाए रखने का संदेश मिलता है।

शिवचरित्र

शिव के चरित्र से यह सीख मिलती है कि अपनी आवश्यकताओं को सीमित करके ही सुखमय जीवन व्यतीत किया जा सकता है। महात्म्य, त्याग और साधना को अपनाकर मनुष्य साधारण जीवन में भी परम शांति प्राप्त कर सकता है।

ऊँ नमः शिवाय · ऊँ नमः शिवाय · ऊँ नमः शिवाय · हर हर महादेव

ऊँ नमः शिवाय, ऊँ नमः शिवाय, ऊँ नमः शिवाय, ऊँओम नमः शिवाय नमः शिवाय, नमः शिवाय। हर-हर महादेव।

अस्वीकरण:
यह लेख आध्यात्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण पर आधारित है। पाठक इसका अध्ययन विवेक एवं श्रद्धा से करें।
हर हर महादेव

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