Shiv puja शिव वंदना (shiva vandana)
ॐ अजय स्मरामि - भगवान शिव ध्यान और भक्ति ॐ अजय स्मरामि ध्यान की सार्थकता और भगवान शिव की भक्ति ईश्वर होते हुए भी भगवान शिव जी कठोर भूमि पर शयन करते हैं। भोग, ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं की ओर दृष्टि नहीं देते। महलों का सुख छोड़, अनवरत तपस्या और ध्यान में लीन रहते हैं। संसार के कल्याण के लिए कालकूट तिक्ष्ण विष को धारण करने वाले नीलकंठेश्व को हम नमन करते हैं। हे प्रभु, तेरी महिमा का कोई पार नहीं है। तेरी महिमा का कोई बखान नहीं कर सकता। हे दयावान, हे त्रिपुरारी, हे महायोगी, योगीराज शंभू, आपकी जय हो, आप की जय, आपकी जय हो। हे प्रथम गणों के स्वामी, अपनी कृपा से हम सभी भक्तों को हमेशा भरपूर बनाए रखें। हे भोले, हम भक्त नादान हैं। पूजा की सही विधि नहीं जानते, सही मंत्र को जपने की विधि विधान नहीं जानते। हम तो केवल आपके चरणों में अपना सच्चा दिल रख सकते हैं। भगवान शिव, आप केवल भोग और सांसारिक सुखों में लिप्त नहीं हैं, बल्कि आपने हमें यह शिक्षा दी कि सच्ची भक्ति और तपस्या से ही आत्मा की शांति और संसार की भलाई संभव है। हे भोलेनाथ, हमें मार्ग दिखाइए, हमारी बुद्धि और हृदय को आपके ...