"लिंग पुराण से भगवान शिव की महिमा | शिव ही सृष्टि के परम कारण"
लिंग पुराण से भगवान शिव की महिमा भूमिका लिंग पुराण में भगवान शिव के अनंत रूपों और उनकी सर्वोच्च सत्ता का अद्भुत वर्णन मिलता है। सतनकुमार मुनि और शैलाद जी के संवाद में यह स्पष्ट होता है कि शिव ही समस्त सृष्टि के आदि, मध्य और अंत हैं। वे ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर रूप में कार्य करते हैं और समस्त जगत शिवस्वरूप है। शैलाद जी का वर्णन सतनकुमार मुनि ने शैलाद जी से भगवान शिव के नामों और स्वरूपों का पुनः वर्णन करने का आग्रह किया। शैलाद जी ने कहा— कुछ आचार्य और मुनि शिव को वेद स्वरूप कहते हैं। कुछ ने उन्हें हिरण्यगर्भ पुरुष प्रधान रूप में वर्णित किया है। कुछ विद्वानों ने शिव को ईश्वर स्वरूप , शब्द ब्रह्म , और सृष्टि का परम कारण माना है। वास्तव में, शंकर से भिन्न अन्य कोई भी वस्तु नहीं है। शिव का सृष्टि विधान शैलाद जी बताते हैं— परम कारण से उत्पन्न होकर भगवान शिव ने अपने मुख से ब्रह्मा को उत्पन्न किया और सृष्टि रचना का आदेश दिया। ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया और पालन की व्यवस्था विष्णु को दी। महेश्वर स्वयं देवताओं के बीच स्थित होकर ज्ञान प्रदान करने लगे। ...