लंकेश जल
लंकेश जल 🔱 चित्र का निर्माण AIके सौजन्य से (ॐ )भगवान शिव और रावण की अद्भुत कथा 🔱 कैलाश पर्वत की गोद में जब देवों के देव महादेव विराजमान थे, तभी एक अनोखी कथा का सूत्रपात हुआ। लंका के पराक्रमी राजा रावण ने अपनी कठोर शिवभक्ति से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया, एवं फलस्वरूप भगवान शिव से आत्मलिंग का वरदान प्राप्त किया। किंतु विधि का विधान कुछ और ही था। मार्ग में स्वयं गणेशजी उनके साथ चल पड़े और हर पड़ाव पर “लंकेश, जल” कहकर उन्हें ठहरने पर विवश करने लगे। यही से प्रारंभ हुई वह कथा, जिसमें रावण की शक्ति, शिव की लीला और गणेशजी की बुद्धिमत्ता एक साथ प्रकट हुई। कथा का विस्तार रावण ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर, आत्मलिंग का वरदान प्राप्त किया। शिव ने चेतावनी दी थी कि इसे मार्ग में कभी भी धरती पर नहीं रखना चाहिए। रावण आत्मलिंग लेकर कैलाश से प्रस्थान करता है। उसी समय भगवान विष्णु और देवताओं ने चिंता व्यक्त की— यदि यह लिंग लंका पहुँच गया तो देवताओं के लिए कठिनाई होगी। देवताओं के संकेत पर गणेशजी एक छ...