भगवान शिव के लिंग और उनकी मूर्ति के पूजा का रहस्य तथा महत्व का वर्णन
शिवलिंग और शिव मूर्ति पूजा: भक्ति का अद्वितीय मार्ग भगवान शिव की भक्ति में न केवल श्रद्धा, बल्कि साधना और अर्पण का भी अद्भुत महत्व है। सूत जी ने स्पष्ट किया है कि जो व्यक्ति श्रवण, कीर्तन और मनन के अनुष्ठानों में समर्थ नहीं है, वह भी शिवलिंग या शिव मूर्ति की स्थापना और पूजा के माध्यम से संसार सागर से पार हो सकता है। भक्ति और अर्पण का मार्ग भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार निम्नलिखित अर्पित कर सकते हैं: धनराशि, पुष्प, दीप और विविध व्यंजन। मन और श्रद्धा से मंडप और उत्सव की स्थापना। आह्वान से लेकर विसर्जन तक, सभी क्रियाओं में भक्तिभाव । सूत जी कहते हैं कि यदि यह सब भक्तिभाव से किया जाए, तो भगवान शिव की कृपा अवश्य प्राप्त होती है, चाहे संसाधनों की कमी हो या न हो। शिवलिंग और मूर्ति में पूजा का रहस्य देवताओं की पूजा उनके रूप और आकृति के आधार पर होती है। भगवान शिव निराकार भी हैं और रूपवान भी, इसलिए उनकी पूजा शिवलिंग और मूर्ति दोनों में होती है। शिवलिंग – शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक। मूर्ति – शिव के साकार स्वरूप का प्रतीक। मुख्य स...