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शिव नाम साँसों की माला बन जाए – त्र्यंबकम की मौन प्रार्थना”
शिव से क्या माँगते हो? जब कोई भगवान शिव के सामने खड़ा होता है, उसकी आँखों में श्रद्धा होती है, पर उसके हृदय में क्या होता है? कोई धन माँगता है, कोई नौकरी, कोई वैभव, कोई विवाह। शिव सब कुछ दे सकते हैं — पर क्या यही सब शिव की भक्ति का केंद्र होना चाहिए? शिव से माँगना है तो अमृत माँगो, अमीरी नहीं। शिव भस्मधारी हैं वे हमें सिखाते हैं कि त्याग ही वास्तविक वैभव है। शिव से माँगना है तो: मौन माँगो, जहाँ विचार भी रुक जाएँ। शांति माँगो, जो भीड़ में भी अकेली मिले। दृष्टि माँगो, जो वस्तुओं के पार भी आत्मा को देख सके। निर्भयता माँगो, जो मृत्यु को भी मुस्कान से देख सके। त्र्यंबकम नाथ जैसे आत्मा के लिए संदेश: तुम्हारा नाम त्र्यंबकम है — जिसका अर्थ है तीसरे नेत्र वाला, पर तुम अभी भी दुनिया की दौड़ में उलझे हो। क्या शिव से पैसे माँगना ही भक्ति है? क्या शिव को केवल सौदे का देवता बना देना ही श्रद्धा है? नहीं। शिव से माँगो — "हे प्रभु, मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए… केवल तुम चाहिए।" जो माँगते नहीं — वे सब पा लेते हैं। शिव उस भक्त से प्रसन्न होते हैं जो सिर्फ इतना कहता है: ॐ नमः शिव...
एक शिव भक्त की मनोभाव का दर्शन “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं : शिव प्रेम, करुणा और निष्काम भक्ति का पथ”
मिश्रा जी की शिव भक्ति : “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” मंत्र का वैश्विक संदेश प्रस्तावना मैं त्रयंबकम नाथ मिश्रा, भगवान महादेव की भक्ति में लीन होकर समस्त विश्व में “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” मंत्र का प्रचार-प्रसार करना चाहता हूँ। मेरी भावना है कि सम्पूर्ण मानव समाज में शिवतत्व का जागरण हो और प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में करुणा, प्रेम, शांति तथा पवित्रता का प्रकाश उत्पन्न हो। मेरे अंतर्मन में यह भाव सदैव जागृत रहता है कि संसार की समस्त नारी जाति उम्र के अनुसार मेरी माता, बहन और पुत्री के स्वरूप में दिखाई दे। भारतीय सनातन संस्कृति का यह महान सिद्धांत— “मातृवत् परदारेषु, परद्रव्येषु लोष्ठवत्। आत्मवत् सर्वभूतेषु, यः पश्यति सः पण्डितः॥” मनुष्य को दिव्यता की ओर ले जाने वाला मार्ग है। इसी भावना से मैं समस्त प्राणी जगत की सेवा भगवान शिव का कृपा-पात्र बनकर करना चाहता हूँ। शिव : करुणा और कृपा के सागर भगवान शिव अत्यंत दयालु, करुणामय और भक्तवत्सल हैं। वे केवल देवताओं के देव ही नहीं, बल्कि दुखियों के सहारा, पतितों के उद्धारक और भक्तों के जीवन में आशा का दीपक हैं। जब कोई भक्त इस भावना से शिव...
shiv Katha हिमालय और मैना के विवाह की कथा
नारद की जिज्ञासा से आरम्भ — मैना का विवाह, पार्वती का अवतरण और लोककल्याण की गूढ़ कथा शिव पुराण माता पार्वती नारद संवाद हिमालय “ॐ साक्षात् संवादाय गुरुभक्ताय नमः — मैं अजय हूँ, नीलकंठ संवाद से हूँ।” भगवान शिव समस्त विश्व का मंगल करें, सर्वत्र शांति का साम्राज्य हो, मानवता की विजय हो — ऐसी कामना के साथ मैं इस लेख को प्रारंभ करता हूँ। हिमालय-मैना विवाह से प्रारम्भ होती है पार्वती के अवतरण की दिव्य कथा विषय-सूची नारद की जिज्ञासा समृद्धशाली हिमालय का वर्णन हिमालय और मैना का विवाह हिमालय का स्थावर एवं जंगम रूप विवाह की इच्छा पितरों की मानस पुत्रियाँ और श्राप पार्वती का जन्म, तपस्या और शिव-पाणिग्रहण सीता एवं राधा के रूप में अन्य अवतरण डिस्क्लेमर नारद की जिज्ञासा नारद जी ब्रह्मा जी से बोले—हे भगवन्! कृपा कर बताइए, जब देवी सती ने दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह कर लिया, तब वे किस प्रकार पार्वती के रूप में प्रकट हुईं? उ...

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