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शिव लीला: पार्वती जी की तपस्या से लेकर भगवान शिव के दिव्य रूप के दर्शन तक

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mohanan.blogspot.com 🔱 शिव लीला 🔱 पार्वती जी की तपस्या पार्वती जी का कठोर तपस्या का एकमात्र उद्देश्य भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करना था। इसके लिए उन्होंने ऐसे घने जंगल का चयन किया जहां सिंह, बाघ, सर्प और भालू की संख्या बहुत अधिक थी। ऐसा कहा जाता है कि पार्वती जी ने 12 वर्षों तक केवल धूने का सेवन किया, और 64 वर्षों तक पत्ते खाकर, घनघोर वर्षा में भीगते हुए तथा प्रचंड गर्मी में पंचाग्नि तप कर कठोर तपस्या की। उनकी उग्र साधना से तीनों लोक जलने लगे। ब्रह्मा जी स्वयं प्रकट हुए और बोले — "हे जगत जननी! आपका तप अब पूर्ण हो गया है, भगवान शिव आपको पति रूप में प्राप्त होंगे।" 🌺 पार्वती के स्वयंवर की घोषणा ब्रह्मा जी के वचनों के बाद पार्वती जी अपने घर लौटीं। माता मैना देवी ने उनके मस्तक को चूमा और पिता हिमालय ने पार्वती जी के स्वयंवर की घोषणा कर दी। 🌸 देवताओं का आगमन स्वयंवर की सूचना सुनकर विष्णु, ब्रह्मा, इंद्र, चंद्र, ग्रह, नक्षत्र, नाग, गंधर्व, यक्ष सभी देवता रत्नजटित आभूषणों और सुन्दर वस्त्रों से अलंकृत होकर अपने रथों से वहाँ पहुँचे। 💎 स्व...

भगवान शिव का विवाह | पार्वती संग दिव्य विवाह कथा और कार्तिकेय जन्म

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  monthan.blogspot.com   ॐ अजय स्मरामि भगवान शिव का विवाह महाबली तारकासुर का भगवान विष्णु को पराजित करना — इसके संबंध में लिंग पुराण में कथा आती है। तारका पुत्र तारकासुर ब्रह्मा जी के वरदान से महाबली और अजेय बन गया था। उसका और भगवान विष्णु का एक हज़ार वर्षों तक युद्ध चला, जिसमें तारकासुर ने भगवान विष्णु को पराजित कर रथ सहित सौ योजन पीछे हटा दिया। देवताओं का भय और गुरु बृहस्पति की शरण विष्णु जी की हार के बाद तारकासुर के अत्याचार तीनों लोकों में फैल गए। उसने देवताओं के कार्य छीन लिए। भयभीत देवता गुरु बृहस्पति की शरण में गए। तब गुरु बृहस्पति सभी देवताओं को लेकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी ने कहा — "इस संकट का समाधान तभी होगा जब भगवान शिव का विवाह पार्वती जी से होगा, जिससे उत्पन्न पुत्र (कार्तिकेय) ही तारकासुर का संहार करेंगे।" देवराज इंद्र और कामदेव का दूत बनना गुरु बृहस्पति ने यह जानकारी पाकर कामदेव को बुलाया। कामदेव अपनी पत्नी रति सहित उपस्थित हुए। इंद्र ने कहा — “हे कामदेव! आप रति सहित भगवान शिव की तपस्या भंग करें ताकि उनका विवाह पार्व...

शक्ति और महर्षि पराशर की कथा – श्री लिंग महापुराण

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            monthan.blogspot.com                 ॐ अजय स्मरामि शक्ति और महर्षि पराशर की कथा (श्री लिंग महापुराण से उद्धृत) परिचय श्री लिंग महापुराण में वशिष्ठ के ज्येष्ठ पुत्र शक्ति का आख्यान और महर्षि पराशर की कथा वर्णित है — जिसमें शिव कृपा, विष्णु का आशीर्वाद और वशिष्ठ वंश का उद्धार सम्मिलित है। ● वशिष्ठ पुत्र शक्ति का भक्षण : एक बार ऋषियों ने सूत जी से पूछा — हे सूतजी! यह बताइए कि वशिष्ठपुत्र शक्ति का भक्षण कैसे हुआ? सूत जी बोले — रुधिर नामक राक्षस पूर्वकाल में विश्वामित्र के श्राप से उत्पन्न हुआ था। उसी ने वशिष्ठ के पुत्र शक्ति और उनके छोटे भाइयों का भक्षण कर लिया। यह सुनकर वशिष्ठ जी अत्यंत व्यथित हो उठे और मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। जब वे पर्वत से कूदने लगे तो देवी पृथ्वी ने अपने करों में उन्हें थाम लिया। उनकी पत्नी और पुत्रवधू अत्यन्त दु:खी हुईं। पुत्रवधू ने दुःख मे...

शिव पुराण में पूजा और ध्यान का रहस्य | भगवान शिव की उपासना विधि और पार्वती संवाद से प्रेरित साधना

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🔱 शिव पुराण में पूजा और ध्यान का रहस्य 🔱 ॐ अजय स्मरामि 🌿 शिव-पार्वती संवाद का महत्व शिव पुराण में भगवान शिव और पार्वती के संवाद में पूजा का क्रम विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। यह संवाद केवल कथा नहीं बल्कि आध्यात्मिक रहस्य है। प्रत्येक शब्द साधक के लिए एक मार्गदर्शक दीपक समान है। 🕉 पूजा का आरंभ – ब्रह्ममुहूर्त में सर्वप्रथम ब्रह्ममुहुर्त में स्नान करके भगवान शिव और अपने गुरु का चिंतन करें। गुरु वही योग्य होता है — जिसके पास वेदज्ञान हो, जिसका चरित्र उज्ज्वल हो और जो वाचा, मनसा, कर्मणा से पवित्र आचरण वाला हो। ⚡ कलयुगी गुरु से सावधान कलयुगी गुरु वाणी में मीठे परंतु दृष्टि में भौतिक होते हैं। वे शिष्य के धन पर लोभ रखते हैं और उसे भ्रमित कर लेते हैं। ऐसे गुरु का चिंतन साधना में बाधक होता है। 🪔 ध्यान और आसन पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके एकाग्रचित्त होकर बैठें। शरीर के पंचतत्वों की शुद्धि करें, अंगन्यास करें और देवताओं का आवाहन करें। इसके बाद पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करें। भगवान शिव का ध्यान प्राणायामयुक्त होने से फल अत्यधिक उत्तम होता है। प्रा...

हरिकेश: यक्ष की दुर्लभ शिव भक्ति | आनंदवन और काशी की पौराणिक कथा

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🕉️ हरिकेश : एक यक्ष की दुर्लभ शिव भक्ति 🔹 प्रस्तावना : हर युग में कुछ ऐसे भक्त जन्म लेते हैं जिनकी आत्मा स्वयं महादेव के ध्यान से जुड़ जाती है। उनकी भक्ति किसी कर्म या व्रत की नहीं, बल्कि आत्मिक एकत्व की होती है। ऐसी ही एक कथा है यक्ष हरिकेश की — जिसने अपनी मौन साधना से स्वयं भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। 🌺 1. यक्ष का जन्म और तपस्या का आरंभ : हिमालय के उत्तरी पवर्तों में आनंदवन नामक स्थान था, जहाँ देवता, गंधर्व और यक्ष निवास करते थे। वहीं एक यक्ष जन्मा — नाम था हरिकेश । बचपन से ही उसमें वैराग्य था। उसने देखा कि संसार का सुख क्षणभंगुर है। तभी उसके हृदय में शिवभक्ति का दीप जल उठा। 🕉️ 2. मौन साधना और ‘ॐ नमः शिवाय’ की जपधारा : हरिकेश ने संसार का मोह त्याग दिया और एकान्त वन में जाकर ध्यान लगाया। उसका एक ही संकल्प था — “जब तक शिव साक्षात् न हों, मैं न उठूँगा।” वह बिना जल और अन्न के केवल ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करता रहा। उसकी देह कृश हो गई, पर आत्मा ज्योतिर्मय हो उठी। 🌿 3. देवताओं की परीक्षा : इन्द्र और अन्य देवताओं ने उसकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। ...

भील भक्त की अटूट श्रद्धा — भगवान शिव के साक्षात दर्शन की कथा | भक्ति बनाम कर्मकांड

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monthan.blogspot.com           भक्ति में श्रद्धा का बल — भील भक्त और भगवान शिव का साक्षात्कार भक्ति में श्रद्धा का बल भील भक्त और भगवान शिव का साक्षात्कार 1. श्रद्धा का महत्व भगवान शिव की पूजा में श्रद्धा का बहुत महत्व है। चाहे कोई जप, तप, यज्ञ या रुद्राभिषेक करे, परंतु भगवान शिव को कर्मकांड की नहीं, शुद्ध भक्ति की आवश्यकता है। और इस भक्ति में श्रद्धा का होना अनिवार्य है। 2. निवेदन भगवान शिव अनन्त, अगोचर, अनादि, परब्रह्म परमेश्वर हैं। उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। प्रभु का स्तवन करना और उनकी सेवा करना ही सच्चा जीवन है। 3. एक भक्त की कहानी एक बार एक जंगल में एक भील युवक रहता था जो शिकार करता था। एक दिन संयोग से वह एक नदी किनारे पहुंचा और वहां शिवलिंग देखा। उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसे अपनी ओर खींच रहा हो। वह भावविभोर होकर शिवलिंग के पास गया और अपने शिकार का एक टुकड़ा प्रभु को अर्पित कर दिया। 4. मंदिर का पुजारी शाम को जब पुजारी आया तो देखा कि शिवलिंग पर मांस चढ़ा हुआ है। उसने शिवलिंग को धोकर चंदन से पूजा की। अगले दिन फिर वही दृश्य द...