शिव गीता में श्रीराम का भक्ति रहस्य: भगवान शिव और राम का अद्भुत मिलन
monthan.blogspot.com 🌺 शिव गीता में श्रीराम का भक्ति रहस्य 🌺 भगवान शिव की भक्ति और पूर्ण समर्पण से मनुष्य वरदान देने में भी सक्षम हो जाता है। इसका उदाहरण महर्षि जमदग्नि हैं, जिन्होंने अपने पुत्र परशुराम को यह वरदान दिया कि कोई भी राजा उन्हें युद्ध में पराजित नहीं कर सकेगा। इसी प्रकार राजा शांतनु ने भी भीष्म पितामह को आशीर्वाद दिया — “पुत्र! तू इच्छा-मृत्यु को प्राप्त होगा।” शिव गीता में वर्णित है कि जब रावण ने माता सीता का अपहरण किया, तब भगवान श्रीराम व्याकुल होकर वृक्षों, पशुओं से पूछ रहे थे — “क्या तुमने मेरी वैदेही को देखा है?” तब महामुनि अगस्त्य ने कहा — “हे राम, अपने स्वरूप को पहचानिए। आप और त्रिदेवों में कोई भेद नहीं। केवल शिव की उपासना ही आपके वियोग-संताप को शांत कर सकती है।” अगस्त्य मुनि के उपदेश पर श्रीराम ने भगवान शिव की आराधना की। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने कहा — “हे राम, रावण मेरा भक्त है, पर मैं धर्म का साथ दूँगा। जो धर्म के मार्ग पर चलता है, उसकी विजय निश्चित है।” श्रीराम को भगवान शिव की कृपा से ...